Roops Diary

शायरी दिल से..

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Roops Diary

मै तेरी तस्वीर देख के आज भी तुझसे बातें तो करती हूँ.!

पर वोः प्यार अब नहीं करती ..!!

क्योकि देखा है तुम्हे टुकड़े टुकड़े में बदलते ..!

तोह इस रिश्ते मई मई एतबार भी नहीं करती ..!! 

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Roops Diary

मुझे बेशुमार चाहत थी,बस तेरी एक हो जाने की..!

पर तूने कई बजह ढूंढ ली.एक बस मेरा न होने की..!!

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Roops Diary

तू आज भी बेवजह आ जाता है मेरे  ख्वाबाओं मै ..!

पर यकीं मान ..!

मै आज भी आखें नहीं खोलती हं तेरे धुंधला जाने से ..!!

कह पाती हूँ की है अब भी तुझसे मोहबत , मेरे कुछ  उलटे सीधे ज़ज़्बातों को ..!!

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Roops Diary

अगर दो जिस्म मिलकर एक हुए होते कभी .!

तो यु बिस्तर पे आयी हर औरत दिल मै बसी होती ..!!

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Roops Diary

ये तो मैंने यु ही कह दिया ,

की हम अलग हो गए ,

क्या हकीकत मै तुम मेरा साथ हमेशा के लिए चाहते थे...?

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हर कोई अपने दायरे मै कैदी है ,

जिसे जब थोड़ी जगह मिली ,उसने तब रुक रुक कर साँस ली ...!!

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Roops Diary

संगमरमर में लिखा वो तुम्हारा नाम ,

और उस पर पढ़ती बारिश की बूंदें,

बारिश- मेरे मन मैं पढ़ी सारी धुंदली परतों को धो जाती है,

और फिर से मैं तुम्हारे प्रेम में अधीर होकर बहने लगतीहूँ, 

मेरा खुद को तुम्हे  इस तरह पाना अच्छा लगता है,

मैं खदु से मिल पाती हूँ तुम्हे ऐसे पाकर,

पर ऐसी लगातार पढ़ती बारिश,

मुझे बहुत कुछ समझा भी जाती है,

ना समझ सी हसी, ना समझ सा उतावलापन 

पर तुम नहीं समझ आते 

तुम्हे प्यार करना  और तुम्हारे प्यार में होना

दो अलग अलग से मोड़ है,

एक मोड़ मैंने चुना  और एक मेरी सहेली सा  मेरे पीछे आ गयी. ...

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Ek Nazariya

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